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December 19, 2025 भारत में विज्ञान और प्रौद्योगिकी: नवाचार और विकास के प्रमुख अपडेट्स

पिछले 24 घंटों में, भारत ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण प्रगति देखी है। संसद ने परमाणु ऊर्जा के सुरक्षित और उन्नत उपयोग के लिए 'शांति विधेयक 2025' पारित किया है, जो देश के ऊर्जा परिदृश्य को बदलने और परमाणु विज्ञान में नवाचार को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखता है। सरकार ने नवाचार, अनुसंधान और तकनीकी विकास को बढ़ावा देने के लिए कई राष्ट्रीय मिशन और योजनाएं भी शुरू की हैं, जिनमें 'अनुसंधान विकास और नवाचार (RDI) योजना' और 'राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (NQM)' प्रमुख हैं। इसके अतिरिक्त, आपदा प्रबंधन और जलवायु लचीलेपन में विज्ञान और प्रौद्योगिकी का लाभ उठाया जा रहा है, और एक भारतीय टीम ने नासा के 'स्पेस एप्स चैलेंज 2025' में सैटेलाइट इंटरनेट अवधारणा के लिए 'मोस्ट इंस्पिरेशनल अवार्ड' जीता है।

भारत ने पिछले 24 घंटों में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां और नीतिगत निर्णय देखे हैं, जो देश के नवाचार और तकनीकी विकास को गति देने के लिए तैयार हैं।

परमाणु ऊर्जा के लिए 'शांति विधेयक 2025' पारित

भारतीय संसद ने 'सतत दोहन और परमाणु ऊर्जा का भारत को बदलने के लिए संवर्धन विधेयक, 2025' (SHANTI Bill) पारित कर दिया है। इस विधेयक का उद्देश्य भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को मजबूत करना है, साथ ही स्वास्थ्य सेवा, कृषि, जल, खाद्य प्रसंस्करण, उद्योग, अनुसंधान और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में परमाणु विज्ञान और प्रौद्योगिकी के व्यापक अनुप्रयोग को सक्षम करना है। यह विधेयक परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB) को वैधानिक दर्जा भी प्रदान करता है, जिससे नियामक निरीक्षण मजबूत होगा और वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के प्रति भारत की प्रतिबद्धता परिलक्षित होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस विधेयक को भारत के तकनीकी परिदृश्य के लिए एक 'परिवर्तनकारी क्षण' बताया है, जो सुरक्षित कृत्रिम बुद्धिमत्ता को बढ़ावा देने और हरित विनिर्माण को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा में विधेयक पर चर्चा के दौरान परमाणु सुरक्षा, राष्ट्रीय संप्रभुता और सार्वजनिक जवाबदेही को गैर-परक्राम्य बताया।

नवाचार और अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देने के लिए सरकारी पहल

विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने देश भर में युवाओं, शोधकर्ताओं, वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों के बीच नवाचार, अनुसंधान, उद्यमिता और तकनीकी विकास को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय मिशनों और योजनाओं की एक विस्तृत श्रृंखला लागू की है। इस दिशा में एक प्रमुख पहल 'अनुसंधान विकास और नवाचार (RDI) योजना' है, जिसका छह साल में ₹1 लाख करोड़ का परिव्यय है। इसका लक्ष्य अनुसंधान और नवाचार में निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करना, डीप-टेक और रणनीतिक प्रौद्योगिकियों का समर्थन करना, परिवर्तनकारी परियोजनाओं को वित्तपोषित करना और 'डीप-टेक फंड ऑफ फंड्स' के निर्माण की सुविधा प्रदान करना है। RDI योजना ऊर्जा संक्रमण, जलवायु कार्रवाई, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम प्रौद्योगिकियों, रोबोटिक्स, अंतरिक्ष, जैव प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवा, चिकित्सा उपकरण और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों पर केंद्रित है।

राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (NQM) में प्रगति

भारत 'राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (NQM)' को भी लागू कर रहा है, जिसके लिए आठ साल के लिए ₹6,003.65 करोड़ का परिव्यय है। इस मिशन के तहत, क्वांटम कंप्यूटिंग, संचार, सेंसिंग और सामग्री को आगे बढ़ाने के लिए IISc बेंगलुरु, IIT मद्रास (C-DoT के साथ), IIT बॉम्बे और IIT दिल्ली में चार विषयगत हब स्थापित किए गए हैं। भारत सुपरकंडक्टिंग क्यूबिट चिप्स और संबंधित प्रौद्योगिकियों के विकास को प्राथमिकता दे रहा है ताकि अपने क्वांटम कंप्यूटिंग पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत किया जा सके।

आपदा प्रबंधन और जलवायु लचीलेपन में विज्ञान और प्रौद्योगिकी

सरकार आपदा प्रबंधन और जलवायु लचीलेपन को मजबूत करने के लिए कई क्षेत्रों में विज्ञान और प्रौद्योगिकी का लाभ उठा रही है, जिसमें स्वास्थ्य, कृषि और पर्यावरणीय स्थिरता पर ध्यान केंद्रित किया गया है। IIT रुड़की में आपदा जोखिम न्यूनीकरण पर एक समर्पित उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किया गया है। इसके अतिरिक्त, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय चक्रवात, बाढ़, भूस्खलन, लू, बिजली गिरने, सूखे और हिमनद झील के फटने के लिए प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों पर शोध को वित्तपोषित कर रहे हैं।

नासा के स्पेस एप्स चैलेंज में भारतीय टीम को 'मोस्ट इंस्पिरेशनल अवार्ड'

चेन्नई स्थित टीम 'फोटोनिक्स ओडिसी' ने नासा के '2025 अंतर्राष्ट्रीय स्पेस एप्स चैलेंज' में 'मोस्ट इंस्पिरेशनल अवार्ड' जीता है। इस टीम ने दूरदराज के क्षेत्रों में ब्रॉडबैंड पहुंच का विस्तार करने के लिए एक संप्रभु, चरणबद्ध-एरे सैटेलाइट इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर की अवधारणा प्रस्तुत की। इस परियोजना का उद्देश्य जमीनी निर्भरता को कम करना और भारत में 700 मिलियन से अधिक लोगों को जोड़ने में मदद करना है, जिनके पास वर्तमान में ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी नहीं है।

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