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December 13, 2025 भारत में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के नवीनतम अपडेट्स: अंतरिक्ष, AI, परमाणु ऊर्जा और बायो-इकोनॉमी में प्रगति

पिछले 24 घंटों में भारत ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल की हैं। इनमें ISRO द्वारा अमेरिकी उपग्रह BlueBird-6 का आगामी प्रक्षेपण, गगनयान मिशन की प्रगति और 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन की स्थापना की योजना शामिल है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में, भारत ने AI लैब के उद्घाटन और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े निवेश के साथ अपनी स्थिति मजबूत की है, साथ ही कॉपीराइट अधिनियम में AI संबंधी मुद्दों को संबोधित करने के लिए संशोधन पर विचार कर रहा है। परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए एक ऐतिहासिक विधेयक को मंजूरी दी गई है, जबकि जैव-अर्थव्यवस्था और जैव प्रौद्योगिकी में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।

भारत ने पिछले 24-48 घंटों में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रगति की है, जो देश को वैश्विक नवाचार के मानचित्र पर मजबूती से स्थापित कर रही है।

अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में नई ऊंचाइयां

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) 15 दिसंबर को अपने शक्तिशाली LVM3 रॉकेट का उपयोग करके अमेरिका के 6.5 टन वजनी संचार उपग्रह BlueBird-6 का प्रक्षेपण करने जा रहा है। यह प्रक्षेपण भारत और अमेरिका के बीच अंतरिक्ष सहयोग को और मजबूत करेगा। LVM3 रॉकेट भारी पेलोड को निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO) और भू-समकालिक स्थानांतरण कक्षा (GTO) में ले जाने में सक्षम है।

गगनयान मिशन भी तेजी से आगे बढ़ रहा है, जिसमें 2027 तक भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजने की योजना है और लगभग 8,000 परीक्षण पूरे किए जा चुके हैं। इसके अतिरिक्त, ISRO का लक्ष्य 2035 तक एक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करना है, जिसका पहला मॉड्यूल 2028 में लॉन्च होने की उम्मीद है। तमिलनाडु के कुलसेकरपट्टिनम में एक दूसरा अंतरिक्ष केंद्र 2027 तक लघु उपग्रह प्रक्षेपण यान (SSLV) के प्रक्षेपण के लिए चालू हो जाएगा।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार

भारत AI नवाचार का एक प्रमुख केंद्र बन रहा है। Cognizant ने बेंगलुरु में अपनी इंडिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) लैब और Cognizant Moment™ Studio का उद्घाटन किया है, जिसके तहत अगले तीन वर्षों में जनरेटिव AI में 1 बिलियन डॉलर का निवेश किया जाएगा। विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के लिए AI के विवेकपूर्ण उपयोग को वरदान बताया है।

देश एक सुरक्षित, स्केलेबल और AI-सक्षम क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण कर रहा है, जिसमें 2030 तक क्लाउड डेटा सेंटर क्षमता में 4-5 गुना वृद्धि का अनुमान है। Amazon, Microsoft, Google और Apple जैसी प्रमुख तकनीकी कंपनियों ने भारत में AI, क्लाउड और विनिर्माण प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने के लिए 70 बिलियन डॉलर से अधिक के निवेश की घोषणा की है। विशेष रूप से, माइक्रोसॉफ्ट ने क्लाउड और कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के लिए भारत में 1.5 लाख करोड़ रुपये के निवेश की योजना बनाई है। भारत के AI मिशन में अमेरिकी उद्योगों को साझेदारी के लिए आमंत्रित किया गया है, क्योंकि फरवरी 2026 में नई दिल्ली में इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 का आयोजन होने वाला है। सरकार कॉपीराइट अधिनियम में संशोधन पर भी विचार कर रही है ताकि AI-संबंधित मुद्दों को संबोधित किया जा सके, जिसमें "व्यापक लाइसेंसिंग" ढांचे का प्रस्ताव है जो ChatGPT जैसे बड़े भाषा मॉडल द्वारा उपयोग किए गए डेटा के लिए रॉयल्टी भुगतान प्रदान करेगा।

परमाणु ऊर्जा में निजी क्षेत्र की भागीदारी

केंद्र सरकार ने परमाणु ऊर्जा विधेयक 2025 (SHANTI - Sustainable Harnessing of Advancement of Nuclear Energy for Transforming India) को मंजूरी दे दी है। यह ऐतिहासिक कदम 63 साल पुराने राज्य एकाधिकार को समाप्त करेगा और निजी खिलाड़ियों को परमाणु ऊर्जा उत्पादन में भाग लेने की अनुमति देगा। इसका लक्ष्य 2047 तक परमाणु ऊर्जा क्षमता को 8 GW से बढ़ाकर 100 GW करना है।

जैव प्रौद्योगिकी और बायो-इकोनॉमी का विकास

भारत की जैव-अर्थव्यवस्था ने पिछले एक दशक में 10 बिलियन डॉलर से बढ़कर 165 बिलियन डॉलर की उल्लेखनीय वृद्धि देखी है, जिसका लक्ष्य 2030 तक 300 बिलियन डॉलर तक पहुंचना है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) और बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्री रिसर्च असिस्टेंस काउंसिल (BIRAC) ने वैक्सीन अनुसंधान, विकास और नवाचार के लिए महामारी तैयारी नवाचार गठबंधन (CEPI) के साथ अपनी 'भागीदारी रणनीति' का नवीनीकरण किया है। BioE3 नीति का उद्देश्य जैव-विनिर्माण, जीनोमिक्स और AI-सक्षम जैव प्रौद्योगिकी जैसे उभरते क्षेत्रों के लिए उच्च प्रशिक्षित कार्यबल तैयार करना है।

अन्य तकनीकी प्रगति

वाराणसी में भारत के पहले स्वदेशी हाइड्रोजन फ्यूल सेल यात्री पोत का अनावरण किया गया, जो स्वच्छ और टिकाऊ अंतर्देशीय जल परिवहन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) ने विदेशी पत्रकारों के एक प्रतिनिधिमंडल की मेजबानी की ताकि उन्हें भारत की वैज्ञानिक प्रगति और नवाचार नेतृत्व से अवगत कराया जा सके। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने तकनीकी उत्पादों के विकास और व्यावसायीकरण को बढ़ावा देने के लिए दो दिवसीय प्रौद्योगिकी शोकेस 'टेक-वर्स 2025' का शुभारंभ किया। भारतीय नौसेना अपने बेड़े में स्वदेशी डाइविंग सपोर्ट क्राफ्ट 'DSC A20' को शामिल करने जा रही है, जिसका विशाखापत्तनम में नौसेना विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला (NSTL) में व्यापक परीक्षण किया गया था।

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