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December 12, 2025 भारतीय अर्थव्यवस्था में उछाल, व्यापार चुनौतियाँ और महत्वपूर्ण नीतिगत सुधार

एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर 7.2% कर दिया है, जो मजबूत विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों के साथ-साथ बढ़ी हुई खपत को दर्शाता है। इस बीच, भारत को व्यापार मोर्चे पर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें अमेरिका और मैक्सिको द्वारा टैरिफ लगाए जाने की संभावना है। सरकार ने 'श्रम शक्ति नीति 2025' सहित कई महत्वपूर्ण सुधारों की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य सामाजिक सुरक्षा और कार्यस्थल सुरक्षा में सुधार करना है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में, भारत AI-संचालित राष्ट्रीय सुरक्षा प्रणालियों की ओर बढ़ रहा है और जैव-अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण प्रगति कर रहा है। प्रधानमंत्री मोदी अगले सप्ताह जॉर्डन, इथियोपिया और ओमान की यात्रा पर जाएंगे, जिससे द्विपक्षीय संबंध मजबूत होंगे।

अर्थव्यवस्था और व्यापार

एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि (जीडीपी ग्रोथ) का अनुमान बढ़ाकर 7.2 प्रतिशत कर दिया है, जो पहले 6.5 प्रतिशत था। एडीबी की रिपोर्ट के अनुसार, हाल ही में हुई कर कटौती से लोगों की खर्च करने की क्षमता बढ़ी है, जिससे भारत की आर्थिक बढ़त और तेज हुई है। जुलाई-सितंबर तिमाही में भारत की जीडीपी ग्रोथ 8.2 प्रतिशत रही, जो पिछले छह तिमाहियों में सबसे ज्यादा है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने भी वित्त वर्ष 2025-26 के लिए वास्तविक जीडीपी ग्रोथ 7.3% रहने का अनुमान लगाया है। एडीबी ने वित्त वर्ष 2026 के लिए महंगाई का अनुमान भी घटाकर 2.6 प्रतिशत कर दिया है, जो पहले 3.1 प्रतिशत था। मजबूत ग्रामीण मांग, जीएसटी में कटौती और बैंकों द्वारा अधिक कर्ज देने से आर्थिक गतिविधियां अच्छी बनी रहेंगी। नवंबर में इक्विटी म्यूचुअल फंड में 21% की वृद्धि के साथ 29,911 करोड़ रुपये का निवेश हुआ है।

व्यापार मोर्चे पर, भारत को कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया है कि भारत अमेरिका के साथ व्यापार समझौते के लिए कोई तय समय-सीमा लेकर नहीं चल रहा है। इस बीच, मैक्सिको सरकार ने भारतीय उत्पादों पर 50% तक शुल्क लगाने का फैसला किया है, जो 1 जनवरी, 2026 से लागू होगा। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी भारत के चावल पर सख्त टैरिफ लगाने का संकेत दिया है। विदेशी फंडों की निकासी और व्यापार अनिश्चितता के कारण रुपया डॉलर के मुकाबले 90.37 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा है कि भारत अब पारंपरिक अर्थव्यवस्था से आगे बढ़कर एक नवाचार-आधारित राष्ट्र बन चुका है और तकनीक-आधारित विकास में वैश्विक रुझान तय कर रहा है। वे इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल (आईआईएसएफ) 2025 में एक विशेष सत्र को संबोधित कर रहे थे। भारत आज बायोटेक्नोलॉजी, न्यूक्लियर इनोवेशन, रीजेनरेटिव साइंसेज़ और अगली पीढ़ी की स्पेस टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में नेतृत्वकारी भूमिका निभा रहा है। IFSEC India 2025 में AI-आधारित सुरक्षा, क्वांटम-रेज़िलिएंट सिस्टम और उन्नत निगरानी तकनीक चर्चा के केंद्र में रहे। भारत 2030 तक AI-पावर्ड नेशनल सिक्योरिटी सिस्टम्स की ओर बढ़ रहा है। भारत की जैव-अर्थव्यवस्था 2014 में 10 बिलियन डॉलर से बढ़कर अब लगभग 140 बिलियन डॉलर तक पहुंच चुकी है।

अंतर्राष्ट्रीय संबंध

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 से 18 दिसंबर तक जॉर्डन, इथियोपिया और ओमान की विदेश यात्रा पर जाएंगे। यह यात्रा भारत-जॉर्डन संबंधों की 75वीं वर्षगांठ, भारत-इथियोपिया रिश्तों को गहरा करने और भारत-ओमान की रणनीतिक साझेदारी के 70 साल पूरे होने के अवसर पर हो रही है। दिसंबर 2025 में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा और 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन ने दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक साझेदारी को नया आयाम दिया। दोनों देश 2030 तक 100 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

सामाजिक कल्याण और नीतियां

मोदी सरकार द्वारा 1 जनवरी, 2026 से देशभर में 25 नए नियम लागू किए जा रहे हैं। इनमें किसानों के लिए बिना गारंटी वाले कृषि ऋण की सीमा को 2 लाख रुपये तक बढ़ाना और ईपीएफओ पेंशनभोगियों के लिए पेंशन निकालना आसान बनाना शामिल है। 'श्रम शक्ति नीति 2025' भारत की ड्राफ्ट राष्ट्रीय श्रम एवं रोजगार नीति है, जिसका उद्देश्य न्यायसंगत, समावेशी, तकनीक-सक्षम और भविष्य-उन्मुख श्रम ईकोसिस्टम तैयार करना है। यह नीति सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा, सुरक्षित कार्यस्थल, महिला भागीदारी, कौशल विकास, डिजिटलीकरण और ग्रीन जॉब्स पर विशेष बल देती है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए नए इनकम टैक्स स्लैब में, टैक्स-फ्री आय की सीमा बढ़ाकर ₹4 लाख कर दी गई है, और धारा 87ए के तहत छूट को ₹12 लाख तक की आय के लिए ₹60,000 तक बढ़ाया गया है।

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