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November 25, 2025 भारत में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के नवीनतम अपडेट (24 नवंबर 2025)

24 नवंबर 2025 को भारत ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण गतिविधियों को देखा। इनमें ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और भारत के बीच एक नई प्रौद्योगिकी और नवाचार साझेदारी का गठन, कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों को अपनाने पर केंद्रीय कृषि मंत्री का जोर, और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की आगामी मिशनों की तैयारियां शामिल हैं। वैज्ञानिकों ने जिंक बैटरी के लिए एक नया कैथोड मटेरियल भी विकसित किया है, जो ऊर्जा भंडारण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति का प्रतीक है।

ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और भारत के बीच नई प्रौद्योगिकी और नवाचार साझेदारी

24 नवंबर, 2025 को जोहान्सबर्ग में जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और भारत के बीच एक महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी और नवाचार साझेदारी (ACITI) पर हस्ताक्षर किए गए। यह साझेदारी जलवायु परिवर्तन से लड़ने और आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने पर केंद्रित है, जिससे तीनों देशों के बीच वैज्ञानिक और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।

कृषि क्षेत्र में प्रौद्योगिकी अपनाने पर केंद्रीय कृषि मंत्री का आह्वान

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 24 नवंबर, 2025 को छठे अंतर्राष्ट्रीय एग्रोनॉमी कांग्रेस (IAC 2025) में कृषि वैज्ञानिकों से किसानों के लाभ के लिए व्यावहारिक समाधानों पर शोध करने का आग्रह किया। उन्होंने मशीनीकरण, कार्बन क्रेडिट, जल-बचत खेती, ड्रोन प्रौद्योगिकी, स्मार्ट एग्रीकल्चर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग जैसे क्षेत्रों में काम करने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि किसानों को इन प्रौद्योगिकियों का लाभ मिल सके।

ISRO की आगामी LVM-3 और GSAT-7R मिशनों की तैयारी

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) 24 नवंबर, 2025 को अपनी आगामी LVM-3 (लॉन्च व्हीकल मार्क-3) मिशनों और नौसेना की ताकत बढ़ाने वाले उन्नत संचार उपग्रह GSAT-7R के प्रक्षेपण की तैयारियों में व्यस्त है। ब्लूबर्ड उपग्रह भारत पहुंच गया है और LVM-3 से इसके प्रक्षेपण की तैयारी चल रही है। ISRO अगले महीने GSAT 7R के प्रक्षेपण की भी योजना बना रहा है, जो भारतीय नौसेना की क्षमताओं को मजबूत करेगा।

जिंक बैटरी के लिए नए कैथोड मटेरियल का विकास

भारतीय वैज्ञानिकों ने जिंक बैटरी के लिए एक नया कैथोड मटेरियल विकसित किया है, जो ऊर्जा भंडारण प्रौद्योगिकियों में एक महत्वपूर्ण प्रगति है। यह विकास 21 नवंबर, 2025 को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा घोषित किया गया था। इस नए मटेरियल से बनी जिंक-आयन बैटरियां पारंपरिक कैथोड की तुलना में जिंक आयनों की आवाजाही को तेज करती हैं, संरचनात्मक स्थिरता बढ़ाती हैं और अधिक ऊर्जा संग्रहीत करने में सक्षम होती हैं। यह शोध सेंटर फॉर नैनो एंड सॉफ्ट मैटर साइंसेज (CeNS) में डॉ. अशुतोष कुमार सिंह के नेतृत्व में किया गया।

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