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November 24, 2025 भारत में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के नवीनतम अपडेट्स: त्रि-देशीय तकनीकी साझेदारी और ऊर्जा भंडारण में प्रगति

पिछले 24 घंटों में भारत के विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आए हैं। इनमें भारत, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया के बीच महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों पर सहयोग के लिए एक नई त्रि-देशीय साझेदारी की शुरुआत, रसद, चिप डिजाइन और एन्क्रिप्शन प्रौद्योगिकी में अनुसंधान और विकास के लिए गति शक्ति विश्वविद्यालय और डीआरडीओ के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर, और भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा पर्यावरण-अनुकूल जिंक-आयन बैटरियों के लिए एक नए कैथोड सामग्री का विकास शामिल है।

भारत ने पिछले 24 घंटों में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति देखी है, जिसमें अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और घरेलू नवाचार दोनों शामिल हैं।

भारत, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया के बीच त्रि-देशीय तकनीकी साझेदारी

भारत ने कनाडा और ऑस्ट्रेलिया के साथ मिलकर महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों पर सहयोग के लिए एक नई त्रि-देशीय साझेदारी शुरू की है। यह पहल आपूर्ति श्रृंखलाओं के विविधीकरण, स्वच्छ ऊर्जा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को अपनाने में मदद करेगी। इस साझेदारी का उद्देश्य तीनों देशों के नागरिकों के लिए एक बेहतर भविष्य सुनिश्चित करना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जोहान्सबर्ग में G20 शिखर सम्मेलन के इतर कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीस के साथ एक बैठक के बाद इसकी घोषणा की।

गति शक्ति विश्वविद्यालय और DRDO के बीच समझौता ज्ञापन

भारत की तकनीकी सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में, गति शक्ति विश्वविद्यालय (Gati Shakti Vishwavidyalaya) और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने रसद (logistics), चिप डिजाइन और एन्क्रिप्शन प्रौद्योगिकी में अनुसंधान और विकास के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह सहयोग रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी क्षमताओं को बढ़ावा देने और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों के विकास को गति देने पर केंद्रित है।

जिंक बैटरियों के लिए नए कैथोड मटेरियल का विकास

बेंगलुरु स्थित एक सरकारी अनुसंधान संस्थान के भारतीय वैज्ञानिकों ने पर्यावरण-अनुकूल जिंक-आयन बैटरियों के लिए एक नया कैथोड मटेरियल विकसित किया है। यह नवाचार ऊर्जा भंडारण क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकता है। शोधकर्ताओं ने आमतौर पर प्रयोग किए जाने वाले बैटरी पदार्थ वेनेडियम ऑक्साइड में एक विशेष "थर्मो-इलेक्ट्रोकेमिकल सक्रियण प्रक्रिया" के माध्यम से नियंत्रित संरचनात्मक परिवर्तन किए। इस तकनीक से तैयार नया पदार्थ ज़िंक-वेनेडियम ऑक्साइड (Zn-V2O5) बैटरी में जिंक आयनों की आवाजाही को तेज करता है, संरचनात्मक स्थिरता बढ़ाता है और अधिक ऊर्जा संग्रहीत करने में सक्षम बनाता है। यह शोध सेंटर फॉर नैनो एंड सॉफ्ट मैटर साइंसेज (CeNS) में किया गया, जो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के तहत एक स्वायत्त संस्थान है। यह तकनीक प्रचलित कैथोड सामग्री की क्षमता बढ़ाने का एक सरल और प्रभावी तरीका प्रदान करती है और ऊर्जा भंडारण समाधानों के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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