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November 21, 2025 भारत में विज्ञान और प्रौद्योगिकी: नवीनतम अपडेट्स (20-21 नवंबर 2025)

पिछले 24-48 घंटों में भारत के विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम हुए हैं। इनमें सिकल सेल रोग के लिए पहली स्वदेशी CRISPR-आधारित जीन थेरेपी का शुभारंभ, महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष मिशनों की प्रगति, निजी क्षेत्र की भागीदारी के साथ अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का विस्तार, और नवाचार को बढ़ावा देने वाली सरकारी पहलें शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, ऊर्जा, सुरक्षा और शिक्षा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय तकनीकी प्रगति हुई है।

सिकल सेल रोग के लिए 'बिरसा 101' जीन थेरेपी का शुभारंभ

20 नवंबर, 2025 को भारत ने सिकल सेल रोग के उपचार के लिए अपनी पहली स्वदेशी CRISPR-आधारित जीन थेरेपी 'बिरसा 101' का शुभारंभ किया। वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद–जीनोमिक्स एवं एकीकृत जीवविज्ञान संस्थान (CSIR-IGIB) द्वारा विकसित यह थेरेपी 'सिकल सेल-मुक्त भारत' के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह थेरेपी विशेष रूप से जनजातीय आबादी को प्रभावित करने वाले इस रोग के लिए किफायती उपचार प्रदान करने का लक्ष्य रखती है।

भारत के विस्तारित अंतरिक्ष दृष्टिकोण में प्रगति

भारत अपने अंतरिक्ष कार्यक्रमों में महत्वपूर्ण प्रगति कर रहा है। देश का विस्तारित अंतरिक्ष दृष्टिकोण चंद्रयान-4 (2028 तक चंद्र नमूना-वापसी मिशन), 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन की स्थापना (2028 में पहला मॉड्यूल लॉन्च) और 2027 में गगनयान मानव मिशन जैसे महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को शामिल करता है। भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था 8.2 बिलियन डॉलर से बढ़कर 2033 तक 44 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।

इसके अलावा, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और लार्सन एंड टुब्रो (L&T) के एक कंसोर्टियम द्वारा निर्मित पहला पूरी तरह से निजी क्षेत्र का पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV) अगले साल की शुरुआत में ओशनसैट उपग्रह को लॉन्च करने के लिए तैयार है। यह भारत की अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों के व्यावसायीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। गगनयान अंतरिक्ष यात्रियों में से एक, ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने 20 नवंबर, 2025 को 'विकसित भारत' के सपने को साकार करने में प्रत्येक नागरिक के योगदान पर जोर दिया, जिसमें स्वदेशी रॉकेट और कैप्सूल के माध्यम से अंतरिक्ष में मानव मिशन भी शामिल है।

माईगव राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस क्विज 2025 के 100 विजेताओं ने 11 नवंबर, 2025 को इसरो के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र का दौरा किया, जिसका उद्देश्य भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के साथ जुड़ाव और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देना था।

विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार को बढ़ावा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव (ESTIC) 2025' का उद्घाटन किया और अनुसंधान एवं नवाचार में निजी क्षेत्र के निवेश को बढ़ावा देने के लिए एक लाख करोड़ रुपये का अनुसंधान, विकास और नवाचार (R&D) कोष लॉन्च किया। यह कॉन्क्लेव भारत को वैश्विक विज्ञान और तकनीकी नवाचार का केंद्र बनाने के उद्देश्य से एक प्रमुख सरकारी पहल है। रिपोर्टों से पता चलता है कि मजबूत उत्पाद विकास कौशल और आईटी-सक्षम सेवाओं द्वारा संचालित भारत, एशिया के तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में उभर रहा है, जिसे सार्वजनिक-निजी भागीदारी का समर्थन प्राप्त है।

ऊर्जा और सुरक्षा में तकनीकी प्रगति

आईआईटी धनबाद ने ऊर्जा क्षेत्र में अनुसंधान और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने के लिए ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (ONGC) के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता स्वदेशी ऊर्जा अनुसंधान और उद्योग-अकादमिक सहयोग को मजबूत करेगा। उत्तराखंड पुलिस ने 'पुलिस हैकाथॉन 3.0' सफलतापूर्वक संपन्न किया, जहां युवा तकनीकी उत्साही लोगों ने आधुनिक पुलिसिंग के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), ब्लॉकचेन और साइबर इंटेलिजेंस टूल का उपयोग करके उन्नत सुरक्षा समाधान विकसित किए।

शैक्षणिक और रक्षा क्षेत्र में विकास

बेंगलुरु में 20-21 नवंबर, 2025 को इंडियन सोसाइटी ऑफ एयरोस्पेस मेडिसिन का 64वां वार्षिक सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है, जिसमें एयरोस्पेस मेडिसिन में नवाचारों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। आईआईटी कानपुर के प्लेसमेंट आंकड़ों से पता चला है कि कोर और प्रौद्योगिकी-आधारित क्षेत्रों में लगातार उच्च मांग बनी हुई है, विशेष रूप से बी.टेक कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग के छात्रों के लिए। भारत और फ्रांस ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास सहयोग बढ़ाने के लिए एक तकनीकी समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें वैमानिकी प्लेटफॉर्म, मानवरहित वाहन, AI, साइबर सुरक्षा और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियां जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

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