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November 12, 2025 भारत में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के नवीनतम अपडेट्स: जैव-अर्थव्यवस्था, अंतरिक्ष मिशन और डिजिटल नवाचार

पिछले 24 घंटों में भारत के विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति देखी गई है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत की जैव-अर्थव्यवस्था के 2030 तक $300 बिलियन तक पहुँचने की संभावना पर प्रकाश डाला है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने गगनयान मिशन के लिए एक महत्वपूर्ण पैराशूट परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया है, जो भारत के पहले मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम की दिशा में एक बड़ा कदम है। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने निगरानी क्षमताओं को बढ़ाने के लिए एक सौर-ऊर्जा संचालित एयरशिप परियोजना को फिर से शुरू किया है। इसके अतिरिक्त, भारत में डिजिटल परिवर्तन और AI नवाचार तेजी से बढ़ रहे हैं, जिसमें स्मार्ट राजमार्गों और फिनटेक प्रगति पर जोर दिया जा रहा है।

भारत में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में पिछले 24 घंटों में कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम और घोषणाएँ हुई हैं, जो देश के तकनीकी परिदृश्य को आकार दे रही हैं।

जैव-अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण वृद्धि

केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री, डॉ. जितेंद्र सिंह ने घोषणा की है कि भारत की जैव-अर्थव्यवस्था (Bioeconomy) आने वाले वर्षों में 300 बिलियन डॉलर तक पहुँचने की संभावना है। उन्होंने बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च एंड इनोवेशन काउंसिल (BRIC) के दूसरे स्थापना दिवस को संबोधित करते हुए यह बात कही। इस लक्ष्य को प्राप्त करने में बायोई3 (BioE3) नीति, बायोएनर्जी और बायोमैन्युफैक्चरिंग जैसे पहल महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। फरीदाबाद में 200 एकड़ में BRIC बायो-एंटरप्राइज इनोवेशन पार्क की स्थापना की योजना भी घोषित की गई है। डॉ. सिंह ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत चौथी औद्योगिक क्रांति में जैव प्रौद्योगिकी के केंद्र में है।

अंतरिक्ष क्षेत्र में प्रगति

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अपने पहले मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम, गगनयान मिशन के लिए एक महत्वपूर्ण पैराशूट परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया है। यह परीक्षण झांसी के बबीना फील्ड फायरिंग रेंज (BFFR) में किया गया, जिसमें क्रू मॉड्यूल के लिए मेन पैराशूट सिस्टम का मूल्यांकन किया गया। यह मिशन तीन भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को लगभग तीन दिनों के लिए अंतरिक्ष में भेजेगा और उन्हें सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस लाएगा।

इसके अतिरिक्त, रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने एक सौर-ऊर्जा संचालित एयरशिप परियोजना को फिर से शुरू किया है। यह एयरशिप 17-22 किलोमीटर की ऊँचाई पर निगरानी करेगा और उपग्रहों की तुलना में अधिक लागत प्रभावी विकल्प प्रदान करेगा, जिससे भारतीय वायु सेना (IAF) की खुफिया, निगरानी और टोही क्षमताओं को बढ़ाया जा सकेगा।

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत डीप टेक और अंतरिक्ष दौड़ में एक वैश्विक खिलाड़ी के रूप में उभर रहा है, जिसमें निजी क्षेत्र की कंपनियाँ भी महत्वपूर्ण मील के पत्थर हासिल कर रही हैं।

डिजिटल और AI नवाचार

भारत अपने राजमार्गों को डिजिटाइज़ कर रहा है ताकि गतिशीलता और दक्षता को बढ़ाया जा सके। इसमें वास्तविक समय संचार, स्मार्ट टोलिंग और डिजिटल प्रबंधन शामिल हैं। ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2025 में भारत की डिजिटल प्रौद्योगिकी और वित्तीय नवाचार में प्रगति पर चर्चा की गई, जिसका लक्ष्य फिनटेक क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व हासिल करना है। भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था का 2024-25 तक राष्ट्रीय आय में 13.42% योगदान करने का अनुमान है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में भी भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। OpenAI ने 4 नवंबर, 2025 से भारत में सभी उपयोगकर्ताओं के लिए एक साल के लिए ChatGPT Go को मुफ्त कर दिया है, जिससे भारत के बढ़ते AI बाजार को लक्षित किया जा रहा है। देश में AI पेशेवरों की संख्या 23.5 लाख तक पहुँच गई है और इसमें सालाना 55% की वृद्धि हो रही है। उभरते विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार सम्मेलन (ESTIC 2025) में भी AI-संचालित प्रौद्योगिकियों पर ध्यान केंद्रित किया गया।

रक्षा प्रौद्योगिकी और विनिर्माण

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस बात पर जोर दिया है कि भारत को प्रौद्योगिकी का केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि उसे विकसित करने वाला देश बनना चाहिए। उन्होंने नई रक्षा प्रौद्योगिकियों जैसे AI, मशीन लर्निंग, क्वांटम कंप्यूटिंग और स्वार्म टेक के लिए सैनिकों, वैज्ञानिकों और स्टार्टअप्स के बीच सहयोग का आह्वान किया।

बेंगलुरु में कॉलिन्स एयरोस्पेस ने उन्नत एयरोस्पेस उत्पादों के लिए एक नया 26 एकड़ का विनिर्माण संयंत्र खोला है, जिसमें AI, एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग और रोबोटिक्स जैसी उन्नत प्रौद्योगिकियां शामिल हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डीप-टेक क्षेत्रों में निजी क्षेत्र के अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देने के लिए ₹1 लाख करोड़ के अनुसंधान और नवाचार कोष का भी शुभारंभ किया है।

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