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November 09, 2025 भारत में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के नवीनतम अपडेट्स: चंद्र अन्वेषण, सेमीकंडक्टर विनिर्माण और अंतरिक्ष सहयोग में प्रगति

पिछले 24-48 घंटों में भारत के विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण घटनाएँ देखी गई हैं। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने चंद्रयान-2 से प्राप्त चंद्रमा के ध्रुवीय क्षेत्रों के उन्नत डेटा उत्पादों को वैज्ञानिक समुदाय के लिए उपलब्ध कराया है, जिससे चंद्र अन्वेषण को बढ़ावा मिलेगा। इसके अतिरिक्त, नासा-इसरो सिंथेटिक अपर्चर रडार (NISAR) उपग्रह को 7 नवंबर, 2025 को आधिकारिक तौर पर चालू घोषित कर दिया गया। घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देते हुए, टाटा समूह ने असम में एक विशाल सेमीकंडक्टर संयंत्र की स्थापना की घोषणा की है, जबकि ISRO ने अपने PSLV रॉकेट के विकास का 50% भारतीय उद्योग को हस्तांतरित करने की योजना बनाई है। भारत ने लक्ज़मबर्ग के साथ विज्ञान और अंतरिक्ष सहयोग को गहरा करने की भी पुष्टि की है और एक आगामी AI शिखर सम्मेलन के लिए एक कर्टेन-रेज़र कार्यक्रम आयोजित किया है।

भारत ने पिछले 24-48 घंटों में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की है, जो चंद्र अन्वेषण से लेकर घरेलू विनिर्माण और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग तक फैली हुई हैं।

चंद्र अन्वेषण में ISRO की पहल

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 8 नवंबर, 2025 को घोषणा की कि वह चंद्रयान-2 ऑर्बिटर से प्राप्त चंद्रमा के ध्रुवीय क्षेत्रों के उन्नत डेटा उत्पादों को वैज्ञानिक समुदाय के लिए मुफ्त में उपलब्ध कराएगा। ये डेटा उत्पाद चंद्रमा के ध्रुवीय क्षेत्रों की गहराई से समझ के लिए महत्वपूर्ण हैं, जो पानी की बर्फ, सतह की खुरदुरीपन और ढांकता हुआ गुणों जैसे महत्वपूर्ण सुराग प्रदान करते हैं। ISRO के अनुसार, ये क्षेत्र सौर मंडल की प्रारंभिक रासायनिक स्थितियों को संरक्षित कर सकते हैं, जो ग्रहों के पिंडों के विकास को समझने के लिए महत्वपूर्ण हैं। DFSAR उपकरण द्वारा एकत्र किए गए लगभग 1,400 रडार डेटासेट का उपयोग करके ये उत्पाद विकसित किए गए हैं, जो भविष्य के चंद्र अन्वेषण के लिए समग्र जानकारी प्रदान करते हैं।

NISAR उपग्रह का संचालन

नासा और ISRO द्वारा संयुक्त रूप से विकसित NASA-ISRO सिंथेटिक अपर्चर रडार (NISAR) उपग्रह को 7 नवंबर, 2025 को आधिकारिक तौर पर चालू घोषित किया गया। यह उपग्रह, जिसे 30 जुलाई को लॉन्च किया गया था, पृथ्वी की भूमि और बर्फ की सतहों की हर 12 दिनों में दो बार अत्यधिक विस्तृत निगरानी करने की क्षमता रखता है। ISRO के अध्यक्ष वी. नारायणन ने पुष्टि की कि सभी डेटा कैलिब्रेशन पूरे हो गए हैं, जिससे यह पृथ्वी अवलोकन के लिए अत्यधिक उपयोगी उपग्रह बन गया है।

सेमीकंडक्टर विनिर्माण में बढ़ावा

भारत के घरेलू विनिर्माण क्षेत्र को एक महत्वपूर्ण बढ़ावा मिला है क्योंकि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 7 नवंबर, 2025 को असम में टाटा समूह के 27,000 करोड़ रुपये के सेमीकंडक्टर असेंबली और परीक्षण सुविधा का दौरा किया। यह संयंत्र प्रतिदिन 48 मिलियन चिप्स तक का उत्पादन करने की उम्मीद है, जिसमें फ्लिप चिप और इंटीग्रेटेड सिस्टम इन पैकेज (ISIP) जैसी उन्नत पैकेजिंग प्रौद्योगिकियों का उपयोग किया जाएगा। इस पहल से भारत के आत्मनिर्भर सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने की उम्मीद है।

अंतरिक्ष उद्योग में निजी भागीदारी

ISRO के अध्यक्ष वी. नारायणन ने 6 नवंबर, 2025 को घोषणा की कि अंतरिक्ष एजेंसी का इरादा पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV) के विकास का 50% भारतीय उद्योग संघ को हस्तांतरित करने का है। HAL और L&T के नेतृत्व में यह संघ पहले ही पहला रॉकेट बना चुका है, जिसके इस वित्तीय वर्ष के अंत से पहले लॉन्च होने की उम्मीद है। यह कदम अंतरिक्ष विनिर्माण और लॉन्च में भारत के निजी क्षेत्र की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।

अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और AI पहल

भारत और लक्ज़मबर्ग ने 6 नवंबर, 2025 को विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष अन्वेषण में सहयोग को गहरा करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की। दिल्ली में एक बैठक के दौरान, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और लक्ज़मबर्ग के राजदूत क्रिश्चियन बीवर ने यूरोपीय बाजारों में भारतीय अंतरिक्ष स्टार्टअप को बढ़ावा देने के तरीकों का पता लगाया। चर्चाएँ साइबर सुरक्षा, क्वांटम प्रौद्योगिकियों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे नवाचार-संचालित क्षेत्रों में संयुक्त पहलों को आगे बढ़ाने पर केंद्रित थीं।

इसके अतिरिक्त, भारत में आगामी AI शिखर सम्मेलन के लिए एक कर्टेन-रेज़र कार्यक्रम 7 नवंबर, 2025 को सिएटल में आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में "लोग, ग्रह, प्रगति" के तीन स्तंभों पर ध्यान केंद्रित किया गया और इसमें कृषि-तकनीक में AI और भारत के डिजिटल बुनियादी ढांचे जैसे विषय शामिल थे। यह भारत की AI क्षमताओं को प्रदर्शित करने और इस क्षेत्र में वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देने के प्रयासों को रेखांकित करता है।

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