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November 07, 2025 भारत में विज्ञान और प्रौद्योगिकी: नवाचार और रणनीतिक सहयोग में महत्वपूर्ण प्रगति

पिछले 24 घंटों में भारत के विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम देखे गए, जिनमें हाल ही में संपन्न हुए उभरते विज्ञान और प्रौद्योगिकी नवाचार सम्मेलन (ESTIC) 2025 के परिणाम, NISAR उपग्रह का परिचालन, लक्ज़मबर्ग के साथ अंतरिक्ष सहयोग और 5G/6G अनुसंधान में प्रगति शामिल है। भारत ने AI शासन के लिए अपने दिशानिर्देश भी जारी किए हैं, जो देश के तकनीकी परिदृश्य में एक रणनीतिक बदलाव का संकेत देते हैं।

भारत ने पिछले 24 घंटों में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति और रणनीतिक पहलों का प्रदर्शन किया है। इनमें हाल ही में संपन्न हुए उभरते विज्ञान और प्रौद्योगिकी नवाचार सम्मेलन (ESTIC) 2025 के प्रमुख परिणाम और आगामी अंतरिक्ष मिशन शामिल हैं।

ESTIC 2025 से प्रमुख नवाचार

दिल्ली में 3 से 5 नवंबर तक आयोजित ESTIC 2025, भारत के डीपटेक क्षमता को प्रदर्शित करने वाला एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सम्मेलन का उद्घाटन किया और निजी क्षेत्र द्वारा संचालित अनुसंधान एवं विकास (R&D) को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 1 लाख करोड़ रुपये के अनुसंधान, विकास और नवाचार (RDI) योजना कोष की शुरुआत की।

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा विकसित तीन प्रमुख वैज्ञानिक उपलब्धियों पर प्रकाश डाला:

  • QSIP (क्वांटम सिक्योर इंटीग्रेटेड प्रोसेसर): भारत की अपनी क्वांटम सुरक्षा चिप।
  • 25-क्यूबिट QPU: भारत की पहली क्वांटम कंप्यूटिंग चिप।
  • CAR-T सेल थेरेपी: भारत की पहली स्वदेशी कैंसर सेल थेरेपी।

इन उपलब्धियों के साथ, भारत अब अमेरिका, चीन और कनाडा जैसे चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है जो क्वांटम चिप्स का उत्पादन करते हैं, जो विज्ञान और प्रौद्योगिकी में देश की बढ़ती वैश्विक शक्ति को दर्शाता है। ESTIC 2025 में उन्नत सामग्री, AI, जैव-विनिर्माण, समुद्री अर्थव्यवस्था, डिजिटल संचार, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर विनिर्माण, उभरती कृषि प्रौद्योगिकियों, ऊर्जा, पर्यावरण, जलवायु, स्वास्थ्य, चिकित्सा प्रौद्योगिकियों, क्वांटम विज्ञान और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों सहित 11 प्रमुख विषयगत क्षेत्रों पर चर्चा हुई। यह सम्मेलन भारतीय विज्ञान कांग्रेस (ISC) के संभावित विकल्प के रूप में भी देखा जा रहा है।

अंतरिक्ष और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग में प्रगति

NISAR उपग्रह के परिचालन की घोषणा 7 नवंबर 2025 को होने की उम्मीद है, जिसके बाद यह वैश्विक वैज्ञानिक उपयोग के लिए तैयार हो जाएगा। यह भारत की अंतरिक्ष दृष्टि का विस्तार पृथ्वी अवलोकन से आगे बढ़कर मानव मिशन और अंतरिक्ष आवास तक होने का संकेत देता है।

भारत और लक्ज़मबर्ग ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष अन्वेषण में सहयोग बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। नई दिल्ली में हुई एक बैठक में साइबर सुरक्षा, क्वांटम प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे नवाचार-संचालित क्षेत्रों में संयुक्त पहलों और यूरोपीय बाजारों में भारतीय अंतरिक्ष स्टार्टअप को बढ़ावा देने के अवसरों पर विचार-विमर्श किया गया।

डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर और AI शासन

दूरसंचार विभाग (DoT) ने देश भर में 100 5G प्रयोगशालाएं स्थापित की हैं, जिनका उद्देश्य उन्नत तकनीकी प्रयोगों, नवाचार और 6G अनुसंधान को मजबूत करना है। भारत का लक्ष्य 2030 तक वैश्विक 6G पेटेंट में 10% हिस्सेदारी हासिल करना है।

भारत सरकार ने 5 नवंबर 2025 को औपचारिक रूप से "इंडिया AI गवर्नेंस गाइडलाइंस" का अनावरण किया, जो देश में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विकास, उपयोग और संचालन के लिए एक सिद्धांत-आधारित और 'लाइट-टच' नियामक ढाँचा स्थापित करता है।

इसके अतिरिक्त, Google ने "प्रोजेक्ट सनकैचर" की घोषणा की है, जो अंतरिक्ष में AI डेटा सेंटर स्थापित करने की एक महत्वाकांक्षी शोध परियोजना है, जिसमें पृथ्वी की कक्षा में डेटा प्रोसेसिंग के लिए सौर ऊर्जा से चलने वाले उपग्रहों पर उच्च-प्रदर्शन AI हार्डवेयर का उपयोग किया जाएगा।

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